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।। महत्वपूर्ण जानकारी।।

प्रिय मित्रों वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का वर्णन आता है। प्रत्येक नक्षत्र की अपनी प्रकृति, स्वभाव, गुणधर्म और विशेषता होती है। इन 27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र कहे जाते हैं। ये छ: नक्षत्र है- अश्विनी, अश्लेषा,मघा, ज्येष्ठा,मूल एवं रेवती। गण्डमूल नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चा शुभ प्रभाव में है तो वह समान्य बालक से कुछ अलग विचारों वाला होगा, ऐसे बालक तेजस्वी, यशस्वी एवं नित्य नव चेतन कला से प्रभावित रहता है। अगर बच्चा अशुभ प्रभाव में है तो इन नक्षत्रों में जन्मे बालक क्रोधी,ईर्ष्यावान एवं लंपट होगा।

।।महत्वपूर्ण जानकारी।।

जय श्री कृष्ण…….

मित्रों विल्व वृक्ष बहुत पवित्र वृक्ष होता है। विल्व वृक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, इस के बारे में जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है।

स्कंद पुराण में यह वर्णन किया गया है कि एक बार मां पार्वती अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंकी, जिसके कुछ बुंदे मदार पर्वत पर गिरी, जिससे विल्व वृक्ष की उत्पत्ति हुई।

विल्व वृक्ष के जड़ो में गिरीजा, तल मे महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पतियों में पार्वती, फुलों में गौरी तथा फलों में कात्यायनी वास करती है।

पूजन में विल्व पत्र अर्पण करने से महादेव एवं मां पार्वती प्रसन्न होती है। भगवान भोलेनाथ श्री राम को अपना इष्ट मानते हैं, इसलिए विल्व पत्र पर राम नाम अंकित कर शिव लिंग पर अर्पण करना चाहिए।

विल्व पत्र अर्पण करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए –

मंत्र:-त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संघारं विल्व पत्रं शिवार्पणम् ।।

अर्थात, तीन गुण तीन नेत्र, त्रिशूल धारण करने वाले और तीन जन्मों के पाप संघार करने वाले, से शिव जी आपको त्रिदल विल्व पत्र अर्पित करता हूं।

।।महत्वपूर्ण जानकारी।।

प्रिय मित्रों जब किसी ग्रह के अशुभ प्रभाव किसी व्यक्ति पर पड़ते हैं तो बनते बनते काम बिगड़ जाते हैं।

किसी लड़की के कुण्डली में ग्रहों के ग़लत प्रभाव के कारण शादी में लगातार व्यवधान आ रहे हैं, बात बनते बनते बिगड़ जा रहे है, तो इस उपाय के द्वारा समस्याओं का समाधान हो जाता है। शादी बड़ी सुगमता से होने के रास्ते बन जायेंगे।

मित्रों कार्य की शुरुआत सोमवार से करने होंगे। लगातार 41दिनो तक करने होंगे। घर के पूजा स्थल में भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर को रखें। प्रतिदिन पूजन के वाद रुद्राक्ष के माला से 3 माला जाप करनी है, पूजन के बाद आ रही अड़चनें को दुर करने की प्रार्थना भी करते रहे।

मंत्र :- उं शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाद विध्वंसनाय पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।

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