प्रिय मित्रों वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का वर्णन आता है। प्रत्येक नक्षत्र की अपनी प्रकृति, स्वभाव, गुणधर्म और विशेषता होती है। इन 27 नक्षत्रों में से 6 नक्षत्र गंडमूल नक्षत्र कहे जाते हैं। ये छ: नक्षत्र है- अश्विनी, अश्लेषा,मघा, ज्येष्ठा,मूल एवं रेवती। गण्डमूल नक्षत्र में जन्म लेने वाला बच्चा शुभ प्रभाव में है तो वह समान्य बालक से कुछ अलग विचारों वाला होगा, ऐसे बालक तेजस्वी, यशस्वी एवं नित्य नव चेतन कला से प्रभावित रहता है। अगर बच्चा अशुभ प्रभाव में है तो इन नक्षत्रों में जन्मे बालक क्रोधी,ईर्ष्यावान एवं लंपट होगा।
।।अंकज्योतिष।।
मूलांक 4 :- प्रिय मित्रों अंक शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म 4,13,22 एवं 31 तारीख को हुआ हो उनका मूलांक 4 बनता है। मूलांक 4 का प्रतिनिधित्व राहु करते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी-कभी आश्चर्यचकित करने वाले कार्य कर जाते है। ऐसे लोग राजनीति क्षेत्र मे अपना परचम लहराने वाले होते हैं। लेकिन गलत संगति के कारण खुद के लिए परेशानियां लाते हैं।
।।अंकज्योतिष।।
मूलांक 3 :- प्रिय मित्रों अंकज्योतिष मे 1से 9 तक अंकों का बड़ा महत्व होता है। जिस व्यक्ति का जन्म किसी भी महिने के 3,12,21,30 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 3 होगा। मूलांक 3 गुरु बृहस्पति द्वारा शासित होता हैं। ऐसे लोग मिलनसार, आशावादी एवं दयालु होते हैं। ऐसे जातक अच्छी ज्ञान एवं समझ रखने वाले होते हैं।
।।अंकज्योतिष।।
मूलांक 2 :- प्रिय मित्रों अंकज्योतिष में 1से 9 तक के अंकों का विशेष महत्व होता है। मूलांक हमारे स्वभाव, प्रकृति, गुण एवं दोष के बारे में बताता है। जिन व्यक्ति का जन्म 2,11,20 एवं 29 तारीख को हुआ हैं उनका मूलांक 2 होगा। मूलांक 2 चंद्रमा द्वारा शासित होता हैं। ऐसे लोग अतिसंवेदनशील स्वभाव के होते हैं। प्रेम भावना मे किसी भी रिश्ते को बढ़ाने के लिए किसी भी परिचित से समझौता करने वाले होते हैं।
।।अंकज्योतिष।।
मूलांक 1:- प्रिय मित्रों मूलांक हमारे स्वभाव, प्रकृति, गुण एवं दोष के बारे में बताता है। जिस जातक का जन्म 1,10,19,28 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 1 होगा। मूलांक 1 सूर्य द्वारा शासित होता है। ऐसे व्यक्ति स्वाभिमानी, नेतृत्व करने वाला, दुसरे के अधिनता न स्वीकार करने वाला तथा अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने वाले होते हैं।
।।महत्वपूर्ण जानकारी।।
जय श्री कृष्ण…….
मित्रों विल्व वृक्ष बहुत पवित्र वृक्ष होता है। विल्व वृक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, इस के बारे में जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है।
स्कंद पुराण में यह वर्णन किया गया है कि एक बार मां पार्वती अपनी ललाट से पसीना पोछकर फेंकी, जिसके कुछ बुंदे मदार पर्वत पर गिरी, जिससे विल्व वृक्ष की उत्पत्ति हुई।
विल्व वृक्ष के जड़ो में गिरीजा, तल मे महेश्वरी, शाखाओं में दक्षयायनी, पतियों में पार्वती, फुलों में गौरी तथा फलों में कात्यायनी वास करती है।
पूजन में विल्व पत्र अर्पण करने से महादेव एवं मां पार्वती प्रसन्न होती है। भगवान भोलेनाथ श्री राम को अपना इष्ट मानते हैं, इसलिए विल्व पत्र पर राम नाम अंकित कर शिव लिंग पर अर्पण करना चाहिए।
विल्व पत्र अर्पण करते समय निम्न मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए –
मंत्र:-त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। त्रिजन्म पाप संघारं विल्व पत्रं शिवार्पणम् ।।
अर्थात, तीन गुण तीन नेत्र, त्रिशूल धारण करने वाले और तीन जन्मों के पाप संघार करने वाले, से शिव जी आपको त्रिदल विल्व पत्र अर्पित करता हूं।
।।महत्वपूर्ण जानकारी।।
प्रिय मित्रों जब किसी ग्रह के अशुभ प्रभाव किसी व्यक्ति पर पड़ते हैं तो बनते बनते काम बिगड़ जाते हैं।
किसी लड़की के कुण्डली में ग्रहों के ग़लत प्रभाव के कारण शादी में लगातार व्यवधान आ रहे हैं, बात बनते बनते बिगड़ जा रहे है, तो इस उपाय के द्वारा समस्याओं का समाधान हो जाता है। शादी बड़ी सुगमता से होने के रास्ते बन जायेंगे।
मित्रों कार्य की शुरुआत सोमवार से करने होंगे। लगातार 41दिनो तक करने होंगे। घर के पूजा स्थल में भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर को रखें। प्रतिदिन पूजन के वाद रुद्राक्ष के माला से 3 माला जाप करनी है, पूजन के बाद आ रही अड़चनें को दुर करने की प्रार्थना भी करते रहे।
मंत्र :- उं शं शंकराय सकल जन्मार्जित पाद विध्वंसनाय पुरुषार्थ चतुष्टय लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।
।।ज्योतिष ज्ञान।।
जय श्री कृष्ण…….
प्रिय मित्रों प्रत्येक प्राणी के जीवन में सभी ग्रहों का प्रभाव हमेशा बना रहता है, प्रत्येक क्षण इनके प्रभाव से प्राणि प्रभावित रहता है। शुभ ग्रहों के प्रभाव से प्राणि नयी ऊंचाईयों तक पहुंचता है तथा पाप ग्रहों के दुष्प्रभाव के कारण प्राणि कष्ट पाता है। मित्रों प्राणि के जीवन में राशियों का प्रभाव भी होता है। राशियां 12 होती है।
।।वास्तु शास्त्र।।
जय श्री कृष्ण…….
प्रिय मित्रों वास्तु प्रत्येक प्राणी के जीवन में विशेष महत्व रखता है। वास्तु का प्रभाव प्रत्येक प्राणी पर होता है। अगर किसी भवन में वास्तु दोष की स्थिति होती है तो उसमें नीवास करने वाले जातक को आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक परेशानी हमेशा बनी रहती है।
1. भवन निर्माण में सूर्य ऊर्जा,वायु ऊर्जा एवं चंद्र ऊर्जा की विशेष प्रधानता होती है।
2. व्यक्ति को शयन समय सिर दक्षिण दिशा में रखने से चुंबकीय तरंगों का प्रभाव में रुकावट नहीं होता है जिससे नींद अच्छी आयेगी।
3. बच्चों को अध्ययन करते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर चेहरा कर के बैठना चाहिए, जिससे पढ़ने कि इच्छा शक्ति बढ़ेगी और यादाश्त शक्ति में भी वृद्धि होगी।